पत्रिका न्यूज डेस्क। पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में विद्युत परियोजनाओं के नाम पर सैकड़ों की संख्या में बांध बने हैं। साथ ही कई निर्माणाधीन भी हैं। इन दिनों जोशीमठ में घरों और सड़कों में आई दरारों की वज़ह जमीन के भीतर हो रहे टनल का निर्माण कार्य माना जा रहा है।‌‌ उत्तराखंड में जगह जगह बन रही विद्युत परियोजनाओं पर सवालिया निशान लग रहे हैं।‌ उत्तराखंड के टिहरी में स्थित टिहरी बांध (Tehri Dam) जिसे स्वामी रामतीर्थ सागर बांध भी कहते हैं, 42 किलोमीटर में फैला हुआ है।‌‌ आपकी जानकारी के लिए बता दें यह एशिया का पांचवां सबसे बड़ा बांध भी है।

जोशीमठ में आई आपदा के बाद यह डैम भी चर्चा का हिस्सा बन गया है। इस बांध को 2400 मैगावाट बिजली उत्पादन के लिए बनाना था, जिसके लिए पूरा टिहरी को जलमग्न होना पड़ा तो इसका इतना बड़ा क्षेत्र घेरना स्वाभाविक था लेकिन आज 17 साल बाद इस डैम से मात्र 1000 वाट बिजली का ही उत्पादन हो रहा है।

टिहरी डैम में पुरानी टिहरी शहर समेत 37 गांव गांव डूबे

इस बांध में टिहरी (Tehri Dam) शहर समेत 40 से अधिक गांव जलमग्न हो गया था। इसके अलावा 80 से ज्यादा गांव प्रभावित हुए थे जिनका बाद में सुरक्षित स्थानों पर विस्थापन किया गया था। आज भी 40 ऐसे गांव हैं जहां इस बांध के बनने के बाद जोशीमठ की तरह जमीन दरकने का ख़तरा बना रहता है।

टिहरी डैम को भूकंप से खतरा

इस बांध का निर्माण पहले चरण में सिर्फ हजार मेगावॉट बिजली उत्पादन के लिए किया गया लेकिन बाद में 400 मैगावाट और अधिक बिजली के लिए कोटेश्वर बांध बना। वहीं अंत में 1000 मेगावाट बिजली बिजली निर्माण के लिए टिहरी पंप परियोजना चलाई गई लेकिन आज यह बांध मुश्किल से हजार मेगावॉट बिजली का ही उत्पादन कर रहा है। अगर अधिक तीव्रता का भूकंप आया तो इसके टूटने की संभावना बढ़ सकती है। यदि ऐसा होता है तो टिहरी से सटे ऋषिकेश और हरिद्वार शहर को डूबने में महज़ 1 घंटे में ही डूब जाएगा। इतना ही नहीं इसके अलावा यूपी के मेरठ, बुलंदशहर समेत बिजनोर शहर भी चंद घंटों में जलमग्न हो जाएंगे।‌